ब्रेकिंग
छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी क... कबीरधाम में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू होगी बड़ी मुहिम नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम / उप निर्वाचन 2026 हेतु निर्वाचक नामावली कार्यक्रम जारी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCR) की पहली बैठक आयोजित प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ निगम की सख्त कार्रवाई, कई दुकानों से डिस्पोजल गिलास व झिल्ली पन्नी जब्... राज्यपाल ने संत शदाराम साहिब भाषा भवन का किया शिलान्यास राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अपमान पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिखा ममता बनर्जी को कड़ा पत्र प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल ईश्वर की अनुपम कृति हैं महिलाएं : उप मुख्यमंत्री अरुण साव 4.24 करोड़ के विज्ञापन पर घमासान, भूपेश सरकार के फैसले की जांच के संकेत
देश

25 मासूमों की मौत के बाद सख्ती: केंद्र ने कफ सिरप निर्माण के नियम किए कड़े

नई दिल्ली: मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में जहरीले कफ सिरप से हुई 25 मासूमों की मौत ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस भयावह घटना ने भारत की दवा निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से देश की दवा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए कफ सिरप की जांच प्रक्रिया को और सख्त बना दिया है।

अब अनिवार्य होगी डीईजी और ईजी की जांच

घटना की जानकारी मिलते ही 10 अक्टूबर 2025 को औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने आपात बैठक बुलाकर कार्रवाई शुरू की। इसके बाद इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) ने तत्काल संशोधन जारी किया। नए प्रावधानों के तहत अब देश में बनने वाले सभी ओरल लिक्विड सिरप की तैयार दवा (Finished Product) में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) की जांच अनिवार्य होगी।

तय हुई नई सुरक्षा सीमा

संशोधित मानकों के मुताबिक, किसी भी सिरप में यदि डीईजी या ईजी की मात्रा 0.1% से अधिक पाई जाती है, तो उसे “Not of Standard Quality” घोषित किया जाएगा। यानी, ऐसी दवाएं बाजार में बेची नहीं जा सकेंगी।

बिना आदेश के राज्य स्तर पर रोक

छिंदवाड़ा हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने सतर्कता दिखाते हुए राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में चार ब्रांड के कफ सिरप की आपूर्ति पर अनौपचारिक रूप से रोक लगा दी है। इन सिरप्स को मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन (MPPHSC) के सॉफ्टवेयर से हटा दिया गया है। हालांकि, इस रोक को लेकर न कोई लिखित आदेश जारी हुआ और न ही सार्वजनिक घोषणा, लेकिन फिलहाल सरकारी गोदामों में करीब 5 लाख बोतलें बिना उपयोग के पड़ी हैं।

कैसे सामने आया मामला

छिंदवाड़ा जिले में बच्चों को ‘कोलड्रफ’ नामक कफ सिरप देने के बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। कुछ ही दिनों में 25 बच्चों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए।

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

राज्य के ड्रग कंट्रोलर दिनेश श्रीवास्तव द्वारा की गई जांच में पता चला कि ‘कोलड्रफ’ सिरप के बैच नंबर SR-13 में 46.28% डायथिलीन ग्लाइकॉल मौजूद था। यह मात्रा किसी भी मानक से कई गुना अधिक थी। यह रसायन अत्यधिक विषैला होता है, जो शरीर में पहुंचने पर गुर्दे फेल, तंत्रिका तंत्र को नुकसान और मौत तक का कारण बन सकता है।

नीति स्तर पर ऐतिहासिक कदम

केंद्र सरकार का यह निर्णय केवल मौजूदा संकट से निपटने के लिए नहीं, बल्कि आने वाले समय में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नीति स्तर पर ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। अब सभी फार्मा कंपनियों को हर सिरप के उत्पादन से पहले और बाद में रासायनिक जांच रिपोर्ट जमा करनी होगी, ताकि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button